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उच्च रक्तचाप की चिंता छोड़ें और सेक्स करें

उच्च रक्तचाप की चिंता छोड़ें और सेक्स करें

आमतौर पर यह माना जाता है कि जिन्हें हाई ब्लडप्रेशर यानी उच्च रक्तचाप की समस्या है उन्हें सेक्स से परहेज करना चाहिए जबकि सत्य इसके बिलकुल विपरीत है। यौन संसर्ग के दौरान रक्त चाप जरूर बढ़ता है लेकिन थोड़े समय के लिए ही। यह दीर्घकालीन उच्च रक्तचाप को प्रभावित नहीं करता। चरम यौन सुख (आर्गाज्म) प्राप्ति के बाद नाड़ी तंत्रिका एवं मांसपेशियों का तनाव कम हो जाता है तथा शरीर तनाव शैथिल्य की स्थिति में पहुंच जाता है। इस स्थिति में रक्त चाप भी कम हो जाता है।

सेक्स से न डरें : सेक्स करने से रक्तचाप और बढ़ जाएगा और शरीर पर इसका विपरीत असर पड़ेगा यह खयाल ही स्वास्थ के लिए घातक है। सेक्स का विचार तब तक मन में बना रहता है जब तक वह शारीरिक रूप से संपन्न नहीं हो जाता। यह मनोवैज्ञानिक सत्य है कि सेक्स सुख के बाद अर्से तक उसका खयाल ही दिमाग में नहीं आता। आयुर्वेद में भी कामध्यान को मनोविकार माना गया है। इसी तरह के ध्यान से ही कामज्वर होता है जिससे हारमोन निकालने वाली ग्रंथियां अतिरिक्त स्राव करती हैं जिनका शरीर पर विपरीत असर होता है।

हारमोन शरीर में रासायनिक परिवर्तन के लिए जिम्मेदार होते हैं। यौनसुख प्राप्ति के बाद मस्तिष्क में सिरोटोनीन नामक हारमोन का स्राव होता है संतुष्ट भाव पैदा करने के लिए जिम्मेदार है। सेक्स का अभाव इस प्रक्रिया को पूरी नहीं होने देता। जाहिर है कि सेक्स की गतिविधियों का उस प्रक्रिया से कोई लेना देना नहीं है जिससे उच्च रक्तचाप की समस्या होती है।

उच्च रक्तचाप की कई दवाएं ऐसी होती हैं जिनसे नपुंसकता की शिकायत हो सकती है। चिकित्सक की सलाह से ऐसी दवाओं के डोज को नियंत्रित किया जा सकता है अथवा ऐसी दवाएं देने के लिए कहा जा सकता है जिनसे नपुंसकता भी नहीं आती और उच्च रक्तचाप भी नियंत्रित हो जाता है। अपने मन से या केमिस्ट से पूछ कर नपुंसकता निवारण की कोई दवा न लें क्योंकि इनसे उच्च रक्तचाप के मरीजों को नुकसान हो सकता है।

उच्च रक्तचाप की ऐसी दवाएं जिन से नपुंसकता आती है उन्हें एकाएक बंद करने से नुकसान हो सकता है। ये दवाएं हमेशा के लिए बंद भी नहीं की जा सकती हैं। उच्च रक्तचाप के मरीजों को सेक्स काउंसिलिंग की भी जरूरत होती है इसके लिए किसी विशेषज्ञ की सलाह लेने से हिचकिचाना नहीं चाहिए।

उच्च रक्तचाप को सायलेंट किलर कहा जाता है क्योंकि मरीज को इस समस्या का तब पता चलता है जब बहुत देर हो चुकी होती है। मरीज को स्वयं इसके कोई लक्षण पता नहीं चलते। जब तक विशेषज्ञ उपयुक्त उपकरण से रक्तचाप की जांच न करें तब तक सही स्थिति का पता नहीं चलता है।

अक्सर उच्च रक्तचाप के मरीजों को सिरदर्द, चक्कर आने तथा धुंधला दिखाई देने की शिकायत होती है। वे इसके लिए समान्य चिकित्सा कराते हैं लेकिन उच्च रक्तचाप के एंगल से जाँच नहीं हो पाती, यही वजह है कि स्थिति बिगड़ने के बाद ही रोग की गंभीरता का पता चलता है।

अभी तक ऐसी कोई स्टडी नहीं हुई है जिससे यह तय किया जा सके कि इस तयशुदा उम्र तक ही सेक्सुअल एक्टिविटी जारी रह सकता है। चूंकि इंसान की औसत उम्र में वृद्धि हो रही है इसलिए यौन प्रक्रिया जारी रहे या नहीं यह जानना महत्वपूर्ण हो जाता है।

नपुंसकता दो तरह की हो सकती है । यौनिक शिथिलता को अक्सर बढ़ती उम्र से संबंधित समस्या के तौर पर देखा जाता है। इससे यह भ्रम भी पैदा होता है कि यह समस्या उम्रदराज होने के कारण उत्पन्न हुई है या इसकी कोई वास्तविक चिकित्सकीय वजह भी है।

यह जाना माना एवं सर्वस्वीकार्य सत्य है कि उम्र बढ़ने के साथ शरीर शिथिल होता है और उसके साथ ही इंद्रियाँ भी शिथिल होने लगती हैं। चूंकि उम्र बढ़ने के साथ-साथ कई दूसरी बीमारियाँ भी सिर उठाने लगती हैं इसलिए यौन शिथिलता एक स्वाभाविक प्रक्रिया के रूप में सामने आती है।

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